सना खान के बॉलिवुड छोड़ने पर लोग खुलकर लिख रहे है…अच्छी बात है सना खान के फैसले से मुझे भी ख़ुशी हुई
लेकिन जो लोग सना खान को लेकर खुलकर लिख रहे उन लोगों को कभी मैंने मुस्लिम औरतों के एजुकेशन पर लिखते नहीं देखा....शादी में ज़बरदस्ती लिए जाने वाले दहेज पर लिखते नहीं देखा लड़कियों को भी लड़कों के समान हर फैसले लेने के लिया लिखते नही देखा बाप की दौलत में सिर्फ़ लड़कों की ही क्यू हिस्सेदारी होती लड़कियों की क्यू नही इसके लिए लिखते नही देखा
जबकि सना खान ने साफ़ लिखा कि उसने अपनी आख़िरत सुधारने के लिए ये फैसला लिया ये उसके और खुदा के बीच का मामला है
जबकि जो मेने लिखा वो समाज के बीच का मामला है !!
सना खान एक सेलिब्रिटी थी चंद लाइक RT के लिए सबने उस पर खुलकर लिखा लेकिन जो असल मुद्दे होते है उन पर खुलकर क्यू नही लिखते ? इतना दोगलापन क्यू ?
हो सकता है मेरी बात आपको ग़लत लगे लेकिन हक़ीक़त यही है की हम लोग भी हक़ीक़त लिखने से बचते है !!
नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं

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