पिछले वर्ष झारखंड में चुनाव हुआ था जिसमें भाजपा बुरी तरह से हार गए थे इतनी बुरी तरह से की मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रघुवर दास भी अपना सीट नही बचा पाए थे।
झारखंड के क्षेत्रीय पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राजद तीनों पार्टी गठबंधन के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे थे और बाजी भी मार ले गए थे. इस चुनाव में झामुमो को 30 सीट, कांग्रेस ने 16 सीट और राजद ने एक सीट हासिल कर झारखंड में गठबंधन नाम का झंडा फहरा दिया था। इस चुनाव में भाजपा सिर्फ 25 सीटें ही जीत पाई थी।
इस चुनाव में भी भाजपा के कई स्टार प्रचारक थे जिसमें माननीय प्रधानमंत्री, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अमित शाह भी शामिल थे लेकिन नतीजा यह हुआ कि मुख्यमंत्री भी अपना सीट नही बचा पाए।
दरअसल झारखंड की जनता जो कुछ भी चाह रही थी वो भाजपा के स्टार प्रचारक लोग वो बात अपने रैलियों में जिक्र तक नही किए।
जनता सड़क, रोजगार और अन्य क्षेत्रीय समस्या को लेकर उम्मीद लगाएं बैठे थे लेकिन योगी जी जब झारखंड पहुँचे तो उन्होंने वहीं पाकिस्तान, वहीं राम मंदिर और वहीं देशद्रोही वाले भाषणों से जनता के कान से खून निकाल दिए।
प्रधानमंत्री और अमित शाह भी ऐसे ही भाषणों का भाषण देते देखे गए जिससे झारखंड के जनता को दूर दूर तक कोई मतलब नही था।
साफ तौर पर बोले तो भाजपा वाले लोकसभा चुनाव के प्रचारक वाले करेक्टर से निकल नही पाए थे जो बातें लोकसभा चुनाव के समय उन्होंने बोला था वहीं बात विधानसभा चुनाव में भी बोल रहे थे और इसका परिणाम झारखंड की जनता ने पूरे देश को दिखा दिया।
अब बिहार में चुनाव है सिर्फ राज्य बदल गए है लेकिन सबकुछ वैसा ही है जैसा झारखंड के चुनाव के वक्त था।
औऱ अभी तक भाजपा के स्टार प्रचारक लोग लोकसभा चुनाव वाले करेक्टर से नही निकल पाए है।
योगी आदित्यनाथ फिर बिहार गए है और फिर वही पाकिस्तान और राम मंदिर की बात कर रहे है।
जैसे झारखंड में हेमंत सोरेन के रैलियों में भीड़ देखा गया था वैसा ही अब तेजस्वी यादव के रैलियों में देखने को मिल रहा है।
पिछले 6 सालों से लोग पाकिस्तान और राम मंदिर वाले मुद्दे को सुनकर बौर हो गए है अब झारखंड के जनता की तरह बिहार के लोग भी रोजगार और क्षेत्रीय मुद्दों पर वोट डालना चाहेंगे।
मुझे लगता है कि इस बार बिहार फिर झारखंड हो जाएगा।
तेजस्वी यादव जिन मुद्दों को उठा रहे है उससे मुझे यहीं लगता है कि इस बार तेजस्वी सरकार।
बाकी परिणाम घोषित होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
क्योंकि बिहार बिहार है।
नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं

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