ज्ञान वही सागर हैं जिसका पानी कभी ख़त्म नहीं होता। डुबकी जितनी लगाओ उतनी ही गहराई मिलती है। अगर बात हम ज्ञान की करते है सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा का माध्यम ही है। और शिक्षा हर जीने वाले व्यक्ति का अधिकार हैं।हमारे देश में शिक्षा और उसकी अहमियत हर इंसान को होनी चाहिए। वक्त गुज़रते इसकी अहमियत बढ़ती चली जाएगी। हमारे हिंदुस्तान में महिलाएँ आज शिक्षक बन के दुनिया के कोने कोने में, बच्चों-बच्चों तक शिक्षा पहुँचा रही हैं कभी होम ट्युशन तो कभी मुफ़्त में अपना वक्त निकाल कर गरीब बच्चों को पढ़ा रही हैं । मानव समाज के निर्माण और विकास के लिए शिक्षा और प्रशिक्षण, ज्ञान और जागरूकता व चेतना का बुनियादी महत्व है। दूसरी तरफ ये भी सच है कि महिलाएं समाज का आधा हिस्सा हैं। इसलिए इस वर्ग की शिक्षा और प्रशिक्षण समाज की सुधार और कल्याण के लिए आवश्यक और अनिवार्य है।
औरतों को शिक्षा देना अनिवार्य है, और इस में कोई दो राय नहीं है कि। दीन का ज्ञान रखने वाली महिलाएं सही और गलत, जायज़ और नाजायज़ की हद को जानती और पहचानती हैं। यही औरत आगे चलकर अपने बच्चों तक इल्म पहुँचाती है, और एक अच्छें समाज का निर्माण करने में अपनी भागीदारी निभाती है।
— Nigar Parveen (@NigarNawab) September 17, 2020
इस्लाम में महिलाओं की शिक्षा
इस्लाम ने शिक्षा और प्रशिक्षण को शुरू से ही महत्व दिया। शरीयत-ऐ-इस्लामी ने मर्दों व औरतों दोनों को समान अधिकार और कर्तव्य दिये हैं। दोनों कर्तव्यों को पूरा करने के लिए एक समान रूप से जिम्मेदार हैं। यह बात ज़रूरी है कि दोनो को ही अपना कर्तव्य बखूबी निभाना आना चाहिए। इसीलिए जब तक आप अपने धर्म के ज्ञान को प्राप्त नहीं करते तब तक आप धार्मिक मर्गदर्शन पे नहीं चल सकते। यही वजह हैं कि इस्लाम में मर्द और औरत को समान रूप से शिक्षा की प्राप्ति का हुक्म है।
इस्लाम कहता है ~
हर मुसलमान (मर्द और औरत) पर इल्म हासिल
करना फ़र्ज़ है।
दरहक़ीक़त अल्लाह के बंदों में से सिर्फ
इल्म रखने वाले लोग ही उससे डरते हैं।
इस्लाम से पहले की औरतें बिना इल्म के अपने
अधिकारो को जानने में असमर्थ थीं, ऐसे में पढ़ना और लिखना उनके हक़ में आता ही
नहीं था। ना वो अपने अधिकार के लिए सवाल कर सकती थी ना ही अपने अधिकार को समझ सकती
थी। इसलिए इस्लाम में औरतों को इल्म के मामले में औरत और मर्द को बराबरी का दर्जा
दिया हैं। इस्लाम में कहा गया हैं की औरत का फ़र्ज़ हैं इल्म हासिल करना और इसे
रोकना जुर्म हैं ।
औरतों को शिक्षा देना अनिवार्य है, और इस
में कोई दो राय नहीं है कि। दीन का ज्ञान रखने वाली महिलाएं सही और गलत, जायज़ और
नाजायज़ की हद को जानती और पहचानती हैं। यही औरत आगे चलकर अपने बच्चों तक इल्म
पहुँचाती है, और एक अच्छें समाज का निर्माण करने में अपनी भागीदारी निभाती है।
पहली शिक्षक “बीबी फ़ातिमा शेक और सावित्रीबाई फुले"
शिक्षा को हर महिला तक पहुँचाने का ज़िम्मा
जब सावित्रीबाई फुले ने लिया। तब उनका साथ देने बीबी फ़ातिमा आगे बढ़ी, और एक
अध्यापिका के रूप में सावित्रीबाई फुले के स्कूल में पढ़ाने लगीं। इसके लिए उन्हें
तमाम समाजिक विरोधियो का सामना भी करना पड़ा मगर वह पीछे नहीं हटीं। और उसी तरह घर
घर जा के महिलाओं को शिक्षा के प्रति
जागरूकता फैलाने की मुहिम चलाने लगी। जब सावित्रीबाई फुले के पिता जी ने उन्हें,
दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए, किए जा रहे कामों के कारण पूरे परिवार को घर
से निकाल दिया। तब बीबी फ़ातिमा के भाई ने उन्हें अपने घर में पनाह दी। उस वक्त
मुस्लिम समाज में महिलाओं का इल्म हासिल करना बहुत मुश्किल हो गया था। ऐसा माना जा
सकता है कि, बीबी फ़ातिमा को उन सभी विरोधों का सामना करना पड़ा होगा ।
आज मुस्लिम महिलायें शिक्षा प्राप्त करने और
अच्छी शिक्षक बनने में निरंतर सफ़लता की ओर बढ़ रही हैं । हाल ही में एक बड़ा
उदाहरण बनीं जम्मू और कश्मीर के, कुपवाड़ा
जिले की एक 23 वर्षीय महिला। जिसने प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल
की। वे 829 योग्य उम्मीदवारों की सूची में 350 वें स्थान पर रही। संघ लोक सेवा
आयोग (यूपीएसससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2019 के परिणामों में “नादिया बेग” ने
बड़ी सफलता अर्जित की। इसके साथ हमें भारत का इतिहास भी नहीं भूलना चाहिए ~ भारतीय
ध्वज के लिए अंतिम डिज़ाइन को लेकर सामने आने वाली महिला "सुरैया
तैयबजी" थीं। हालांकि इसके लिए उन्हें कभी श्रेय नहीं मिला। यह उचित समय है,
जब हम उनके योगदान को जानें और उन्हें वह श्रेय दे जिसकी वो सही हकदार हैं।
“डॉ सैय्यदा हमीद”- मौलाना आज़ाद विश्वविद्यालय हैदराबाद की कुलाधिपति हैं। जिन्होंने योजना आयोग की सदस्या के रूप में एक लंबा और शानदार करियर बनाया। मुस्लिम महिला मंच की अध्यक्ष, दक्षिण एशिया में शांति के लिए महिलाओं की पहल की संस्थापक। न्यासी (WIPSA) सदस्य, द्वीप विकास प्राधिकरण, संस्थापक ट्रस्टी, केंद्रीय संवाद और सुलह के लिए। और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्या। कश्मीर में जन्मी, चेयरपर्सन के रूप में कई मानद पद रखती हैं। दिल्ली में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। रोमांचक हितों को रंगमंच और सिनेमा के साथ कविता और लेखनी से फैलाती रहीं। उन्होंने 15 से अधिक पुस्तकों का लेखन एवं सह लेखन किया है, जिसमें ब्यूटीफुल कंट्री: स्टोरीज़ फ्रॉम अदर इंडिया, उनकी अनुपम किर्ती है। साथ ही वे पद्म श्री सहित कई अन्य पुरस्कारों और उपाधियों से सम्मानित हैं।

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