माॅब लिंचिंग, मुस्लमान, सरकार और इंसाफ़ ???? : शाहरुख़ अंसारी

Share:



किसी बेबस और लाचार इंसान को जब इंसानो के रूप में गिद्धों की भीड़ किसी शक के आधार पर घेर लेती है और मालुम पड़ता है की वो मुस्लिम है तो उनका रव्य्या ही बदल जाता है और वे उसको बेरहमी से तब तक पिटते है जब तक वो या तो मर न जाए !!
उसे इंसाफ़ दिलाने के लिए उसके परिवार वाले पुलिस के चक्कर काटते है पहले पुलिस उन्हें मुक़दमा दर्ज करने का आश्वासन दे देती है लेकिन कुछ दिन बाद पता लगता है की पुलिस ने मुक़दमा आरोपियों पर करने के बजाए उसी पर कर दिया जाता है जिसकी लींचिंग हुई हो (जैसे सहारनपुर के इसरार)
ये सब होने के बाद अगर परिवार वाले कोर्ट जाते है तो वहाँ पहले बहुत दिनो तक मुक़दमा चलता है फिर फैसला ये आता है कि या तो कुछ बहाना बनाकर आरोपियों को बरी कर दिया जाता है या फिर जिसकी लींचिंग हुई हो उसे कोई बीमारी का नाम देकर उस बीमारी से उसकी मौत हुई (जैसे:तबरेज अंसारी) ये बात कहकर आरोपियों को बरी कर दिया जाता है।
आख़िर में अधिकतर आरोपी बच जाते है लेकिन मॉब लींचिंग में मारे गए बेगुनाहो को इंसाफ़ नही मिल पाता !! एसे ही न जाने मॉब लींचिंग में मारे गए लोगों के परिवार वालों को आज भी न्याय की उम्मीद है। मॉब लींचिंग की घटनाए बढ़ती ही जा रही है आख़िर सरकार इस पर कोई क़ानून क्यू नही बना रही?

नोट - यह लेखक के अपने विचार हैं इस आर्टिकल में सच झूठ की सारी जिम्मेदारी लेखक की है

No comments