उसे इंसाफ़ दिलाने के लिए उसके परिवार वाले पुलिस के चक्कर काटते है पहले पुलिस उन्हें मुक़दमा दर्ज करने का आश्वासन दे देती है लेकिन कुछ दिन बाद पता लगता है की पुलिस ने मुक़दमा आरोपियों पर करने के बजाए उसी पर कर दिया जाता है जिसकी लींचिंग हुई हो (जैसे सहारनपुर के इसरार)
देश में मॉब लींचिंग की घटनाएँ बढ़ती जा रही—
— Mohd Shahrukh Ansari(محمد شاہ رخ انصاری) (@_shahrukhansari) September 19, 2020
लेकिन इस पर सरकार और मीडिया दोनो ही ख़ामोश है।
न तो सरकार ने इस पर कोई क़ानून बनाया जिसका फ़ायदा उठाकर आरोपी आराम से बच निकलते है।
और ताल ठोकने वाली हल्ला बोलने वाली मीडिया भी इस पर ख़ामोश है !!
अख़िर क्यू ?#moblynching
ये सब होने के बाद अगर परिवार वाले कोर्ट जाते है तो वहाँ पहले बहुत दिनो तक मुक़दमा चलता है फिर फैसला ये आता है कि या तो कुछ बहाना बनाकर आरोपियों को बरी कर दिया जाता है या फिर जिसकी लींचिंग हुई हो उसे कोई बीमारी का नाम देकर उस बीमारी से उसकी मौत हुई (जैसे:तबरेज अंसारी) ये बात कहकर आरोपियों को बरी कर दिया जाता है।
आख़िर में अधिकतर आरोपी बच जाते है लेकिन मॉब लींचिंग में मारे गए बेगुनाहो को इंसाफ़ नही मिल पाता !!
एसे ही न जाने मॉब लींचिंग में मारे गए लोगों के परिवार वालों को आज भी न्याय की उम्मीद है।
मॉब लींचिंग की घटनाए बढ़ती ही जा रही है आख़िर सरकार इस पर कोई क़ानून क्यू नही बना रही?
नोट - यह लेखक के अपने विचार हैं इस आर्टिकल में सच झूठ की सारी जिम्मेदारी लेखक की है
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