जब जंगल की सत्ता बन्दर के हाथ आ गयी : ज्ञानेंद्र दीक्षित

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 लघु कथा



एक जंगल में एक बूढ़ा शेर शासन करता था , प्रजा में अमन चैन एवम भाई चारा था ,प्रजा पुर शुकुन खुशहाल थी , कुछ दिनों बाद जंगल में सुखा पड़ने के कारण हरियाली नष्ट हो गयी,जलाशय सूखने लगे ,प्रजा परेशान होने लगी , शेर ने प्रजा को ढांढस बंधाते हुए समझाया कुछ ही दिनों में सब ठीक हो जाएगा , लेकिन एक बंदर ने अंदर खाने जनता को शेर के विरुद्ध भड़काना चालू कर दिया ,


शेर बूढ़ा हो गया है अब ये राज करने लायक नहीं रहा , में युवा हूँ ,में दिन रात मेहनत करके ,इस जंगल और इसके वाशिंदों की रक्षा करूंगा , दूसरे जंगलों से अपनी बुद्धिमता एवम परिश्रम के बलबूते पानी लाऊंगा ,जिससे हरियाली आएगी सब का जीवन खुशहाल हो जाएगा ,

अव वक्त बदलाब का है कब तक पुराने ढर्रे पर चलते रहोगे ये राजा भ्रष्ट एवम कामचोर है , लोग उसकी बातों में आ गए और शेर के पास जाकर बोले ,अब हम तुम्हें अपना राजा मानने को तैयार नहीं , अब हमारा राजा बंदर होगा ,

शेर समझ गया था प्रजा बंदर के बहकाबे में आ गयी है उसने प्रजा की बात मानली और राज बंदर को शौंप दिया , कुछ दिन बीते , जंगल में झमाझम बारिश हुई ,हर तरफ हरियाली और पानी के भरे हुए जलाशय नजर आने लगे ,बंदर ने प्रजा को इकट्ठा किया और बोला देखा मेरा नशीब , देखी मेरी ईमानदारी मेरी कार्यविधि से खुश होकर इंद्रदेव ने कितनी वरसात की है ,सब बड़े खुश हुए बंदर की जय जय कार करने लगे ,

शेर अपनी गुफा में आने वाले समय को लेकर चिंतित था जब अकाल के दिन आएंगे तव क्या होगा , प्रजा को कौन संभालेगा , दूसरे जंगल से आने वाले भयानक जीवों को जब पता चलेगा इस जंगल का राजा शेर नहीं एक बानर है तो वो हमारे जंगल पर आक्रमण कर देंगे सब तहस नहस कर देंगे हमारे जंगल को , और हमारी प्रजा को गुलाम बना लेंगे , लेकिन उसके हाथ में कुछ नहीं था प्रजा बानर के चंगुल में बुरी तरह फंस चुकी थी , तभी कुछ दिनों बाद अकाल का समय आ गया , हर तरफ हा हा कार मच गया , प्रजा परेशान होने लगी , हर तरफ भुखमरी एवम बीमारियों का आलम था , तभी मौका देखकर पड़ौसी जंगल के जानवरों ने जंगल पर आक्रमण की घोषणा करदी ,

सारी प्रजा राजदरवार में इकट्ठी हुई ,बानर राज से इस संकट से निकालने की याचना की , बानर राज पेढ की ऊंची डाली पर चढ़ गए , प्रजा सोचने लगी शायद बानर राज हमें इस दुविधा से निकालने की युक्ति कर रहे हैं , लेकिन बानर राज इस डाली से उस डाली पर , उस डाली से इस डाली पर गुलाटी खाने लगे काफी देर बाद जंगल की सबसे कमजोर चिड़िया ने बानर राज के पास जाकर पूछा श्रीमान काफी देर से आप उछलकूद कर रहे हो कोई समाधान खोजा कि नहीं ,तो जवाव मिला मेरी मेहनत में कोई कमी हो तो बताओ बाकी सब ईश्वर के हाथ में हैं ,अपनी अपनी सोचो ,में अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं छोडूंगा ,

Folded hands
Folded hands

इस लघु कथा से आप क्या सीखे कमेंट करके बताना , आज यही हो रहा है

नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं

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