विकास की आस दे कर और बड़े बड़े खोखले वादों से इलेक्शन में लोगो का दिल जीत कर इलेक्शन भी जीत गए
पर जैसे जैसे दिन गुजरते गए वैसे वैसे विकास की आस भी धुंधली होती गई और विकास विनाश की ओर तब्दील होता चला गया
दौर-वक़्त के हुक्मरान अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए क्या विकास क्या वादा सब भूल गए
दिन गुजरता चला गया और वादे अब धार्मिक भावना पर तब्दील होता चला गया।
बात थी स्मार्ट सिटी बनाने की शौचालय में अटक गई
वादा था यूनिवर्सिटी स्कूल कालेज का मंदिर में भुला दिया
न ही अस्पताल न ही सड़क न ही रोजगार
सब के सब वादें खोखली और जनता मासूमियत से सब स्वीकार करती गई
देश की अर्थव्यवस्था चौपट
कर्ज़ पर कर्ज
आखिर कब?
विकास की आस लगाए हुए भारतवासी
— Prof. Shad (سایہ) (@profeshad) June 27, 2020
और एक ओर इस पर चर्चा न ही मीडिया कर रही है न ही मंत्री महोदय!
देश को उन्नति विकास की ओर ले जाने की बात थी पर देश को विकासशील के सूची से भी बाहर कर दिया
अगर देश को बचाना है जम्हूरियत को बचाना है
तो आवाज उठाना होगा क्योंकि सवाल है अधिकारों का सवाल है भविष्य का सवाल है देश की आर्थिक स्थिति का।
जय हिंद जय भारत
नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं
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