भूमिपूजन ~ कर्मकांड या चुनावी मुद्दा : काशिफ जमील

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ये कोई पहली बार नहीं है। हर बार और बार बार छोटे से छोटे मुद्दे को, खास कर ऐसे मुद्दे जिनमे धर्म का कोई एंगल निकला ही ना जा सके। उन मुद्दो में भी बीजेपी आईटी सेल सोशल मीडिया, और ख़रीदे हुए मेन स्ट्रीम मीडिया के इस्तेमाल से, धार्मिक एंगल निकाल कर। मुद्दों को हिन्दू मुसलमान बना कर जनता को दिग्भर्मित करती रही है.... 

kashif jameel


ये जानबूझ कर किया जाता है, ताकि आप इन मुद्दों में उलझ कर आपस में वैचारिक लड़ाई लड़ने लगें। और बीजेपी अपने देश बेचने के एजेंडे पे ख़ामोशी से अमल करती रहे। इसलिए सभी मुस्लिम मित्र, खास कर आप जैसे लेखकों को मेरी ये सलाह है। के जिस वैचारिक लड़ाई को आप लड़ रहे हैं उसी पे जमे रहें। प्लांट किये हुए मुद्दों से डायवर्ट न हों। आईटी सेल के फैलाए जाल में न उलझे
हर मुद्दे की तरह, इस पे भी कोई छुटभैया नेता कहीं मुस्लिम को खत्म कर देने की धमकी देगा। फिर उसे मीडिया बढ़ा चढ़ा के दिखाएगी...!! ऐसा लगेगा जैसे, ये कोई छुटभैया नेता नहीं वरन बहुत बड़ा खतरनाक आदमी है। जिस के बचकाने बयान से भी मुस्लिम समाज को डरना चाहिए..!! 
और आप उस पे लिख लिख के, एक तो अपने बुनियादी मुद्दों से डायवर्ट होंगे। दूसरे उस छुटभैया नेता को अनजाने में राष्ट्रीय स्तर पे पहचान दिलाने में भी मदद करेंगे। कभी कोई मुस्लिम नाम वाला पदयात्रा करने की बात करेगा। कोई आज़म खान नाम का आदमी, जलसमाधि लेने की बात करेगा। उसे संबित पात्रा सपा का आज़म खान बताएँगे। और फिर सारे लोग उसको झूठा साबित करने अपनी पुरी ताकत झोंक देंगे..। होना ये चाहिए कि इस तरह के लोगों को बिलकुल किनारे कर के अपने मुद्दों पे डटे रहना चाहिए !!

कहीं कम्युनिस्ट पार्टी को घसीटा जायेगा, कहीं राजद को तो कहीं कांग्रेस को। हर वो पार्टी जिसे मुसलमान वोट दे सकता है। उन्हें जबरदस्ती खींच के इस अखाड़े में उतारने की कोशिश की जाएगी। आखिर बिहार चुनाव भी इसी से साधना है। और आने वाले ऊप चुनाव के साथ UP चुनाव की नींव भी तैयार करनी है..। अभी से पहले इन पार्टियों के किसी काम पे कोई बवाल नहीं हुआ। मगर अब अचानक इन पार्टियों पे भी हाय तौबा मचाई जाएगी। ताकि मुस्लिम इन पार्टियों के बचाने  के लिए आगे आ कर लिखें और मुद्दे भूल जायें।
याद रखिये, आप के किसी पड़ोसी मुल्क को, आपके यहाँ मंदिर मस्जिद गुरूद्वारा या चर्च बन्ने पे कोई इंटरेस्ट नहीं हो सकता। मगर कोई न कोई मुस्लिम पडोसी मुल्क की खबर इस वाकयुद्ध में मिडीया द्वारा लाई जायेगी ही। कोई भरोसा नहीं कि पाकिस्तान ही कोई बयान दे दे। आखिर बिरयानी रिश्ते भी हैं हमारे, उस पडोसी से। 
कभी उद्धव ठाकरे के बहाने शिवसेना, या फिर साकेत गोखले को कांग्रेस से जोड़ के बहाने से। इसे तब तक गर्म करने की कोशिश की जाएगी जब तक के ये, चुनावी भट्टी में वोट की रोटी सेंकने लायक न हो जाये। 
राम मंदिर के नीचे टाइम कैप्सूल दबाने, जैसी बातों से बहुजन समाज को साइंसी झुंझुना दिया  जायेगा। मस्जिद के लिए हो सकता है, जिन्नातों के देखे जाने की बात भी कम पढ़े लिखे मुसलमानों में प्लांट किया जाय। ताकि उनकी धार्मिक आस्था को भी भुनाया जा सके।
अगर इन बातों से काम नही बना, तो आखिरी हथियार ओवैसी को बनाया जाएगा। ये पहली बार नहीं है, हर बार आप रिकॉर्ड उठा के देखें जब भी बीजेपी कहीं फंसती है तब अंत में नैया पार लगाने ओवैसी ही क्यों आते हैं। पहले क्यों नहीं बोलते ? जब बीजेपी फँस और घिर चुकी होती है, तब ही ओवैसी का बयान संजीवनी के तौर पे काम क्यों करता है ? और इस बार तो बीजेपी और ओवैसी दोनों के लिए ये मुद्दा लाभकारी होगा। ओवैसी के इस खेल में शामिल होने से मुद्दा गर्म होते ही बीजेपी को लाभ। साथ ही मुसलमानो का ध्यान हैदराबाद की दो शहीद हुई मस्जिदों से हट कर अयोध्या पर केंद्रित हो जायेगा। TRS जो के बीजेपी को बाहर से समर्थन देती रही है, वो भी सुरक्षित और ओवैसी मुसलमानों के सवालों से भी बच जायेंगे। साथ ही उन्हें भी बिहार में इसका ताजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद हो जायेगी। 
मगर सोचिये हमें क्या मिलेगा ? क्या जनता को इन सभी गर्मागर्म बयानों, और धर्माधन्ता से, इस महामारी से छुटकारा मिल जायेगा ? क्या सब को रोज़गार मिल जायेगा ? क्या सब को रोटी मिल जायेगी ? क्या सभी लोगों को समुचित इलाज मिल जायेगा ? क्या बिहार में बाढ़ की विभिषिका का दंश झेल रहे लोगों को राहत मिल जायेगी ? 
आप अस्पताल की बात कीजिए। आज जनता को किसी भव्य धार्मिक स्थल से ज्यादा जरूरत, सर्वसुविधायुक्त सस्ता इलाज करने वाले अस्पताल की है उस पर फोकस कीजिए अस्पताल को डिस्कशन में लाइये....... !!

भड़काने और भटकाने वाले मुद्दों से दूर रहें। दृढ़ता से देश के मुद्दों पे सवाल करते रहें !!

नोट - यह लेखक के अपने विचार हैं 

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