अब इस देश में कुछ कट्टर पंथियों के सामने अल्पसंख्यकों के जान की कोई कीमत नहीं है वो अक्सर किसी न किसी बहाने माॅब लिंचिंग कर अल्पसंख्यकों की जन ले रहे हैं
इसी कड़ी एक ताजा मामला बिहार के सीतामढ़ी से आया है जहाँ एक भीड़ ने मकई चोरी के इल्जाम में दिनांक 06/06/2020 को रात 9 बजे मोहम्मद वाहिद पर लाठी , चाकू व हथियारों,शस्त्रों से हमला कर मौत के घाट उतार दिया
6/6/2020 सितामरही, बिहार में रात के 9बजे शर-पसंदों की भीड़ ने मकाई (मक्क) चोरी के इल्ज़ाम में "मुहम्मद वाहिद" पर लाठी, चाकू, व हथियारों,शस्त्रों से हमला किये और जान से मारने की कोशिश किये!
बताया जा रहा है कि मॉबलिंचिंग करने वाले यादव थे।
1/2हैरत की बात यह है कि 2 दिन गुज़र गया है लेकिन अभी तक बिहार पुलिस ने कोई भी एक्शन नहीं लिया है।
FIR तो हो गई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या मुस्लमान होना गुनाह है, जो इतने बड़े हादसे के बावजूद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है?..
हैरत की बात यह है कि 2 दिन गुज़र गया है लेकिन अभी तक बिहार पुलिस ने कोई भी एक्शन नहीं लिया है।
— Mufti Wahiduzzaman Siddequey (@MuftiWahidSdy) June 9, 2020
FIR तो हो गई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
क्या मुस्लमान होना गुनाह है, जो इतने बड़े हादसे के बावजूद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है?.. pic.twitter.com/yt4Ln4GunT
अल्पसंख्यकों की माॅब लिंचिंग पर मीडिया द्वारा चुप्पी साध लेने पर एक ट्विटर हैंडल @_shahrukhansari लिखते हैं
अमेरिका के अश्वेतो का भारत की मीडिया ने भी समर्थन किया !!
— Mohd Shahrukh Ansari(محمد شاہ رخ انصاری) (@_shahrukhansari) June 9, 2020
लेकिन वही भारत में हो रही मोब लींचिंग की घटनाओं पर ये चुप्पी साध लेते है!!
एसा क्यू ?
पिछले 6 सालों में किस तरह अल्पसंख्यकों की माॅब लिंचिंग की गयी इसे बताते हुए ट्विटर हैंडल @AasifBhandari लिखते हैं
पिछले 6 सालो में हमने क्या देखा है?इसकी शुरुआत पुणे में मोहसिन शेख की हत्या से हुई फिर,अखलाक को यह कहते हुए मार दिया कि वह गोमांस ले जा रहा है।लेकिन बाद में यह बताया गया कि यह गोमांस नहीं था।यदि यह गोमांस था,तो किसी को किसी व्यक्ति को मारने का अधिकार किसने दिया?#JusticeForMohsin
— 🇮🇳 Mohammad Aasif Bhandari (محمد آصف) 🇮🇳 (@AasifBhandari) June 2, 2020
कुल मिलाकर देखा जाये तो आजकल सिर्फ एक भीड़ होती है जो खुद ही इल्जाम लगाती है और खुद ही फैसला सुनाकर जान से मार डालती है
हमारे न्यायलय की लचर व्यवस्था , सरकार और मीडिया की चुप्पी ने ऐसे लोगों के हौसले बुलंद कर दिए हैं

No comments