संवैधानिक अधिकारों के बावजूद आंदोलन व आलोचना करना जी का जंजाल बन चुका है : आसिफ खान

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Aasif Khan


नोट :- यह लेखक के अपने विचार हैं

दौर-ए-वक़्त की राजनीत में सरकार के अव्यवस्थित नीतियों की आलोचना
करने का ही सबब है "UAPA"।
गैरजिम्मेदाराना बयान एवं गैरजिम्मेदाराना कार्यशैली जो किसी भी क्षेत्र एवं दिशा में कारगर साबित नही होता।
जिसकी आलोचना एवं विरोध कर असहमति जताने पर देशविरोधी बता कर दंडनात्मक कार्यवाही की जाती है।

दूसरी ओर राष्ट्रवादी पार्टी का नेता,प्रवक्ता या कार्यकर्ता का बयान जिसमे एकता अखंडता एवं सौहाद्र बिगड़ने वाली भड़काऊ भाषण के बाद भी
उनपर न तो किसी प्रकार की कार्यवाही होती है न ही नेताओं द्वारा किसी प्रकार की आलोचना की जाती है।
देश की कानून व्यवस्था एवं संविधान को राष्ट्रवादी पार्टियों द्वारा मज़ाक बना कर रख दिया गया।
अपने निजी स्वार्थ के लिए देश की अखंडता की बलि देना इनका पेशा बन चुका है जिसके लिए हर नागरिक को आवाज उठाना आवश्यक है


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