हम लोग बहुत बार देख चुके है की कोम के लीडर जो बने फिरते है उनकी स्पीच में मुसलमानो के लिए एक दर्द झलक रहा होता है, लेकिन एक सवाल मुझ जैसे हज़ारो लाखो मुसलमानो के दिमाग़ में आता है वो ये की ये लीडर जो स्टेज पर कोम को मुत्तहिद होने की बात कर रहे है वो खुद क्यों मुत्तहिद नहीं होते?
अगर इत्तिहाद की लम्बी स्पीच की जगह काम करके दिखाए और खुद मुत्तहिद हो जाए तो समाज के बहुत सारे मसले हल हो जाए, आदमी का एक अच्छा काम उसकी हज़ार स्पीच पर भारी होता है, इत्तिहाद उस वक्त तक नहीं हो सकता जब तक ये लीडर अपने फायदों को साइड पर करके कोम के लिये क़ुरबानी ना दें, आज भारत देश में मुसलमानों को जो मसाइल और परेशानिया हो रही है उसकी असल वजह ये है की उनके पास कोई मजबूत और मुख्लिस लीडर नहीं है, जो लीडर इत्तिहाद की बात कर रहे है वो खुद नफरत का सबब बने हुवे है वो क्या कोम का इत्तिहाद कर सकेंगे! इतने सारे मुस्लिम लीडर में मुसलमानो के सच्चे हमदर्द चिराग लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे, लेकिन कोम और मिल्लत का सौदा करने वाले जरूर मिलेंगे, कुर्सी के लिए मर मिटने वाले जरूर मिलेंगे, अपनी दुकान चमकाने के लिए भड़काऊ भाषण देने वाले जरूर मिलेंगे, ये इसलिए हो रहा है की जो लोग आज लीडर बने हुवे है वो इसके लाइक ही नहीं है, जो लाइक है वो बेइज्जत और रुस्वा होना नहीं चाहते है, अच्छे सच्चे कोम के दर्द को समझने वाले और सही तरीके से कोम को मुत्तहिद बना कर चल सके ऐसे लोगों को जीताने की कोशिश करनी चाहिए, चापलूसी करने वाले रुपियो के लिए ज़मीर बेचने वाले कुर्सी के लालची लोगों को कभी भी चुनना नहीं चाहिए, एक हदीस में सरकारें दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया "कोम का सरदार उनका ख़ादिम होता है" इसलिए जो ख़ादिम हो उसे ही कुर्सी पर बिठावोगे तब जाकर कोम का फायदा होगा.
अगर इत्तिहाद की लम्बी स्पीच की जगह काम करके दिखाए और खुद मुत्तहिद हो जाए तो समाज के बहुत सारे मसले हल हो जाए, आदमी का एक अच्छा काम उसकी हज़ार स्पीच पर भारी होता है, इत्तिहाद उस वक्त तक नहीं हो सकता जब तक ये लीडर अपने फायदों को साइड पर करके कोम के लिये क़ुरबानी ना दें, आज भारत देश में मुसलमानों को जो मसाइल और परेशानिया हो रही है उसकी असल वजह ये है की उनके पास कोई मजबूत और मुख्लिस लीडर नहीं है, जो लीडर इत्तिहाद की बात कर रहे है वो खुद नफरत का सबब बने हुवे है वो क्या कोम का इत्तिहाद कर सकेंगे! इतने सारे मुस्लिम लीडर में मुसलमानो के सच्चे हमदर्द चिराग लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे, लेकिन कोम और मिल्लत का सौदा करने वाले जरूर मिलेंगे, कुर्सी के लिए मर मिटने वाले जरूर मिलेंगे, अपनी दुकान चमकाने के लिए भड़काऊ भाषण देने वाले जरूर मिलेंगे, ये इसलिए हो रहा है की जो लोग आज लीडर बने हुवे है वो इसके लाइक ही नहीं है, जो लाइक है वो बेइज्जत और रुस्वा होना नहीं चाहते है, अच्छे सच्चे कोम के दर्द को समझने वाले और सही तरीके से कोम को मुत्तहिद बना कर चल सके ऐसे लोगों को जीताने की कोशिश करनी चाहिए, चापलूसी करने वाले रुपियो के लिए ज़मीर बेचने वाले कुर्सी के लालची लोगों को कभी भी चुनना नहीं चाहिए, एक हदीस में सरकारें दो आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया "कोम का सरदार उनका ख़ादिम होता है" इसलिए जो ख़ादिम हो उसे ही कुर्सी पर बिठावोगे तब जाकर कोम का फायदा होगा.
लेखक - ✍️ खुबैब रहमानी


अच्छी तहरीर भाई की
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