अली बनात हमारे लिए एक सबक़ : वक़ार खान

Share:
अली बनात का जन्म ऑस्ट्रेलिया के शहर सिडनी में 1982 में हुआ था, इन्हे छोटी उम्र से ही बिजनेस का शौक़ था जिसमें उन्हें बेइंतेहा कामियाबी भी मिली और ये एक कामियाब बिजनेसमैन होने के साथ साथ ऐशो आराम वाली लगज़रियस लाईफ जी रहे थे के अचानक से इन्हें साल 2015 में कैंसर जैसी मुहलिक बीमारी का पता चला और तब डॉक्टरों ने अली बनात को सिर्फ़ 7 महीने की ज़िंदगी बताया जो वो आगे जी सकते हैं।
Ali Banat in Africa
आप और हम सोचें के जिसे कैंसर का पता चले और वोह भी आखरी स्टेज का तब लोग उसी वक़्त अपने आपको सरेंडर कर देते हैं खुद को मरा हुआ समझ लेते हैं बस सांसें चल रही होती हैं लेकिन इंसान मुर्दा हो जाता है, तब उस 25-26 साल के नौजवान ने हार नहीं मानी और उसने एक ऐसी इंस्पिरेशनल लाइन कही जो सुनहरे अक्षरों में अंकित हुई। उसने कहा "Cancer is a gift for me from Almighty ALLAH" यानी वोह मायूस नही हुआ, उसने कोई अल्लाह से शिक्वा शिकायत नही की जैसा के आम इंसान करता है लेकिन अली ने कैंसर को अल्लाह की तरफ़ से तोहफ़ा बताया और फिर वोह अपनी ऐशो आराम वाली ज़िन्दगी को त्याग दिया। आपको जानकर आश्चर्य होगा के उसके पास मंहगे बंगले, फरारी गाडियां, लाखों रुपए के ब्रेसलेट, घड़ी, जूते ये सारे काफ़ी मंहगे थे यानी हर वोह चीज़ जिसे करोड़पति लोग इस्तेमाल करते हैं उसके पास भी थे लेकिन उस बंदे ने सब सुकून कि ज़िन्दगी को छोड़कर फलाही और चैरिटी के कामों में लग गया और अपनी सारी संपत्ति गरीबों में डोनेट कर दी और ऑस्ट्रलिया के सिडनी जैसे ठंडे प्रदेश से निकलकर अफ़्रीका जैसे गर्म देश में जाकर अपनी बची हुई लाईफ को गरीबों के साथ वक्फ कर दिया।
Ali Banat Charity

अली ने एक संस्था बनाई जिसका नाम रखा "MATW" यानी "Muslim Around The World" जो संस्था पूरे विश्व में इंसानियत की खिदमत के लिए अली के जाने के बाद भी कार्यरत है और अली के लिए सदका ए जारिया बनी हुई है। अली सबसे पहले अफ्रीकन देश टोगो का सफ़र किया और वहां जाकर उसने स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, मुसाफ़िरखाने, मस्जिदें, गरीबों, यतिमों, बेवाओं तथा बेसहारा लोगों के लिए कई फलाही काम किए। अली की इस इंसानी ख़िदमत के जज्बे को देखकर सिर्फ अफ़्रीका के एक गांव में 5000 लोगों ने इस्लाम कूबुल कर लिया था।

सबसे अहम बात के ये फलाही काम अली अपनी देख रख में ख़ुद करवाता था जहां तापमान लगभग 45-50°c से भी अधिक होता है जबकि ऑस्ट्रेलिया में तापमान बहुत ही कम होता है फिर भी उसका नशा था इंसानियत की खिदमत करना उसका जज़्बा था अपने रब को उसके पास जाने से पहले उसे राज़ी कर लेना। अली बनात की ये जीवनी बताने का मक़सद ही ये है के हमें भी उसकी ज़िन्दगी से सीख लेकर कुछ ऐसे काम कर जाना चाहिए के रहती दुनिया तक के लिए एक मिसाल बन जाए और आखरत की ज़िंदगी जो की हमेशा हमेश रहने वाली ज़िन्दगी के लिए आसानी पैदा हो और रब आपसे राज़ी हो जाए। दोस्तों ये दुनिया फानी है किसी की ज़िंदगी का पता नहीं के वो कब ख़तम हो जाए और आप का किया हुआ नेक आमाल आपके लिए निजात पाने का ज़रिया बन जाए। हमे भी अली बनात की इस मुख्तसर सी 30-32 साला ज़िन्दगी से सबक हासिल कर अपनी ज़िन्दगी में तब्दीली लानी चाहिए। वैसे अली को डॉक्टरों ने सिर्फ़ 7 महीने ज़िंदा रहने का बताया था लेकिन ऊपर वाला रब ही मौत हयात का जानकार है अली उसके बाद 7 न बल्कि 3 साल और जिए और उनका इंतकाल मई 2018 में हुआ। अल्लाह से दुआ है के अल्लाह अली बनात को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मकाम अता करे आमीन।


Waqar Khan

लेखक - ✍️ वक़ार खान

8 comments:

  1. Allah mout d tu aisi de k mrne s phle aisa kam kr jyen jisse allah r allah k nabi dono razi ho. Allah ali banat ki magfirat farmye

    ReplyDelete
  2. That's what true Momin imaan says a very inspirational & heart touching story... We should learn the best out of it & revive our imaans... May Allah accept his deeds & place him in Jaanat e Firdous... Ameen

    ReplyDelete
  3. Ali banaat ko allah ne achhe amaal karne ka maoqa diya to us aqalmand aur nek bande ne maoqe ko ghaneemat samjha. Allah hame bhi achhe amaal ki taofeeq de🙏
    Aur waqar bhai ke qalam me aur zor de🙏

    ReplyDelete
  4. बहुत अच्छी शुरुआत की है आपने इंशा अल्लाह कामयाबी मिलेगी।

    ReplyDelete
  5. अच्छी शुरुआत अल्लाह आपको कामयाबी दे 🤲

    ReplyDelete
  6. wow nice Article

    ReplyDelete